What is Computer in Hindi – कम्प्यूटर क्या है हिंदी मे

what is computer in hindi

कम्पयूटर एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस है जो Input Data ग्रहण करता है फिर अपने प्रोग्राम के जरिये Process करके आउटपुट देता है। कम्प्यूटर शब्द लैटिन के शब्द Compute से बना है जिसका अर्थ होता है गणना करना।

Input Data → Processing → Output Data 

 

Development of Computer (कम्प्यूटर का विकास)

कम्प्यूटर के विकास मे कम्प्यूटर के इतिहास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैै जिसमे अलग-अलग वैज्ञानिकों ने अपना समय दिया और हर चरण मे हुई खोज मे कुछ न कुछ सुधार किया जिससे आज का कम्प्यूटर बना।

History of Computer (कम्प्यूटर का इतिहास) –

Friends आज जो कम्प्यूटर हम देख रहे है वो एकाकक ही नही बन गया इसके पीछे एक लंबा इतिहास रहा है जो कई चरणों मे धीरे- धीरे करते हुए यहा तक पहुचा है। शुरू मे एक साधारण गणना यंत्र से विकसित करते करते आज का कम्प्यूटर बना जो गणना के साथ साथ लगभग सभी जरूरी चीजे जैसे कम्यूनिकेशन, ग्राफिक्स, फोटो एडिटिंग आदि। यदि बात करे इसके इतिहास की तो यह 3000-4000 साल पुराना है।

तो चलिए हम इसके इतिहास पर नजर डालते है।

अबेकस-

यह सबसे पुराना गणना यंत्र है इसका आविष्कार चीन के लोगो को माना जाता है जिसका इस्तेमाल केवल गिनती के लिए होता था। इसमे लकड़़ी का एक फ्रेम होता था जिसमे समांतर तारों मे मोती या मनके (बीड्स) पिरोये होते थे इन्हे ही गिनने के काम मे लाया जाता था। जापानी लोग इसे सारोबान कहते हैं।

 

abacus
  Abacus

 

मीनतारा-

इसे मेसोपोटामिया के लोग युज करते थे गणना के लिए।

नेपियर बोन्स यंत्र- 

1617 ई. मे स्काटलैंड के जान नेपियर ने Napier’s Bones नामक यंत्न बनाया जो जोड़, घटाव के साथ दशमलव की संखयाओं का गुणा भी कर सकता था। यह अबेकस तथा ईस्वी के बाद इस्तेमाल किया जाने वाला पहला गणना यंत्र था।

पास्कलाइन यंत्र-

1642 ई. मे फांसीसी वैज्ञानिक ब्लेज पास्कल ने पास्कलाइन यंत्र बनाया। यह पूरे विश्व का पहला था। जिसके द्वारा जोड़, घटाव किया जा सकती था। इसका दूसरा एडिंग मशीन था। यह पहला यांत्रिकी गणना यंत्र था।

लेबनीज चक्र-

1694 ई. मे जर्मन गणितज्ञ लेबनीज ने पास्कलाइन को और विकसित कर एक मशीन बनाई लेबनीज चक्र। यह जोड, घटाव, गुणा के साथ भाग भी कर सकती थआ। इसमे गियर और शाफ्ट लगा था जो भाप से चलता था।

चार्ल्स बैबेज Analytical Engine-

1801 ई. के पास अंग्रेज गणितज्ञ चार्ल्स बैवेज (Charles Babbage) ने डिफरेंस ईंजन बनाना शुरू किया और यह 1822 मे बनकर तैयार हुआ लेकिन असफल हो गया।
चार्ल्स बैवेज 1833 ई. मे पुन प्रयास किया और इसका विकसित रूप Analytical Engine बनाया तथा इसमे Process unit को लगाया। अब Coding (Programming) की जरूरत थी ताकि दिए गए निर्देशों को Process कर सके।

इसके लिए चार्ल्स बैवेज ने Ada Augusta से सहयोग लिया जो ब्रिटेन की महिला गणितज्ञ और प्रोग्रामर थी।
अतः Analytical Engine विश्व का पहला Programming Computer था जो दिए गए नर्देशों के अनुसार काम करता था।

Ada Augusta को सम्मान देने के लिए कम्प्यूटर की एक भाषा का नाम ही Ada Language रख दिया गया तथा Ada Augusta को विश्व की पहली महिला प्रोग्रामर का दर्जा दिया गया।
इस तरह यह Analytical Engine बन कर तैयार हुआ।

Analytical Engine प्रोग्रामिंग और प्रोसेस यूनिट के कारण इतना पापुलर हुआ कि इसे विश्व का पहला कंम्प्यूर नाम दिया गया गया तथा Charles Babbage को कम्प्यूटर का जनक कहा गया।

Tabulating Machine-

1890 ईं मे अमेरिका के वैज्ञानिक क Dr. Herman Hollerith ने Tabulating Machine बनाई जिसके साथा पंच कार्ड का आविष्कार कर इसमे इस्तेमाल किया।
इस Tabulating Machine को 1890 ईं. मे USA मे जनगणना करने के लिए काम मे लिया गया। इस मशीन की क्षमता के कारण 10 वर्ष मे होने वाली जनगणना 3 वर्ष मे ही पूरा कर लिया गया।

इससे उत्साहित होकर Herman Hollerith ने 1896 मे एक कंपनी बनायी तथा उसमे पंचकार्ड का निर्माण शुरू किया। इसलिए Herman Hollerith को पंचकार्ड का जनक कहा जाता है।
यह कंपनी 1924 मे IBM के नाम से जानी गयी। आज के दौर मे यह सबसे अधिक PC बनाने वाली Multinational Company है।

Differential Engine-

1930 मे वेन्युमर बुस ने Differential Engine बनाया जो आज के Analog Computer की तरह की काम करता था। मतलब आज के Analog Computer का Basic Comcept इसी पर आधारित था।

1939 मे अमेरिका की हावर्ड युनिवर्सिटी के कुछ छात्रो ने एक Concept दिया जिसके आधार पर IBM और Howard के शिक्षको ने मिलकर विश्व का प्रथम Electronic Mechanical Computer बनाया जो 1944 मे बनकर तैयार हुआ। इसका नाम मार्क – 1 रखा।

ENIAC कम्पूटर-

1941-1946 तक बनकर तैयार हुआ यह विश्व का पहला कम्प्यूटर था जो पूरी तरह से Electronic था। इसे पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी मे बनाया गया। इसमे प्रोग्राम को स्थायी रूप से समाहित किया गया तथा Vaccume Tube का इस्तेमाल हुआ। यह आकार मे एक पूरे कमरे के बराबर था।

इसके पश्चात भी खोज होता रहा और John Von Neumann ने 1945 मे Stored Program Concept (SPC)  दिया इसी पर आज के सभी कम्प्यूटर कार्य करते है। इस Concept के तहत सबसे पहले Input देना होगा then दी गयी इनपुट पर Process होगा और तब Output मिलेगा। मेमोरी मे डाटा और निर्देशों को स्टोर करने का विकास हुआ।

यह विकास इन्होने ही किया इस प्रकार John Von Neumann ने कम्प्यूटर का बेसिक स्ट्रक्चर विकसित किया।

SPC पर बना बना पहला कम्प्यूटर था EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Calculator)   

UNIAC कम्प्यूटर-

1953 मे UNIAC कम्प्यूटर बनाया गया य़ह प्रथम व्यावसायिक कम्प्यूटर था व्यापारिक कामो के लिए बेचने के लिए उतारा गया। इसे जान एकर्ट तथा जान मैकले ने बनाया। इन्होने ही पहला Digital Computer बनाया। 

UNIAC का फुल फाम है Universal Automatic Computer.

Generation of Computer (कम्प्यूटर की पीढ़ियां) 

First Generation of Computer (प्रथम पीढ़ी के कम्पूटर):

प्रथम पीढी के कम्प्यूटर मे नर्वात ट्यूब (Vacuum Tube) का प्रयोग किया गया था। ये आकार मे बहुत बड़े और बहुत भारी होते थे। कभी-कभी तो इनका साइज एक पूरे कमरे के बराबर होता था।

ये सारे information को 0 और 1 के form मे store करते थे तथा इसमे machine language का इस्तेमाल किया गया था।

डाटा को accept करने के लिए Punch Card और Paper Tape का use किया गया था तथा Vacuum Tube गर्म होने मे काफी समय लगता था और एक बार गर्म होने पर बहुत ज्यादा उष्मा निकलता था। जिसके वजह से बड़ी Cooling System लगानी पड़ती थी।

काफी बड़ी साइज, अत्यधिक Energy Consumption तथा हमेशा maintenance के कारण ही वैजानिको को दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर को आविष्कार करने की जरूरत महसूस हुई।

इसके उदाहरण है: ENIAC, UNIVAC, IRM-701, IBM-650

Second Generation of Computer (दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर): 

इस पीढ़ी मे निर्वात ट्यूब का स्ठान हल्के छोटे Computer ने ले लिया जो Size मे छोटे होते थे। जिससे कम्प्यूटर साइज पहले के मुकाबले कम हो गयी। इसमे Binary Machine Language की जगह कुछ आसान Symbolic Assembly Language का use किया गया

लेकिन data accept करने के लिए अभी भी Punch Card का ही use हो रहा था जबकि Magnetic Core को memory के रूप मे इस्तेमाल किया गया।

ट्रांजिस्टर के छोटे साइज और बेहतर (As compare to vacuum tube) होने के कारण कम्प्यूटर छोटा, कम खर्चीला तथा तेज हो गयी। लेकिन अभी भी heat की समस्या बनी हुयी थी फिर क्या था दोस्तो वैज्ञानिको ने फिर से खोज जारी रखा।

इसके उदाहरण है: IBM 7094, Honeywell 400, CDC 3600 etc.

Third Generation of Computer (तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर): 

इसमे पहली बार Integrated Circuit का इस्तेमाल किया गया। Transistor को छोटा करके उसे Integrated Circuit (IC Chip) मे डाला गया। इससे कम्प्यूटर की क्षमता काफी बढ गयी।

Data enter करने के लिए Punch Card की जगह mouse और  keyboard का तथा Printout की जगह Monitor का इस्तेमाल हुआ।

उदाहरण

Fourth Generation of Computer (चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर):

Microprocessor का इस्तेमाल होने लगा जिसमे हजारों  integrated circuits को एक silicon chip पर लगाया गया जिससे कम्प्यूटर काफी छोटा हो गया। कम्प्यूटर की  पहले की पीढ़ीयों के मुकाबले काफी तेज हो गयी।

Operation System तथा C-language का विकास हुआ।

Fifth Generation of Computer (पाचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर):

इसका सबसे बड़ा advantage है कि artificial intelligence का use होने लगा है इससे computer मे खुद निर्णय लेने की क्षमती आ जाएगी तथा कृत्रिम बद्धिमत्ता का उपयोग करके स्वयं समस्या का समाधान कर सकते है।

Advanced Technology जैसे Parallel Processing, Speech Recognition, Quantum Calculation इसी के नतीजे है।

उदाहरण: Desktop, Laptop, NoteBook, Chromebook etc.

Types of Computer:

कम्प्यूटर को work, size और purpose के आधार पर तीन भागो मे बाटा गया है।
Work Size Purpose
1. Analog Computer 
2. Digital, Miniframe, Mainframe, and Super Computer
3. Hybrid

Microcomputer:

Single user system और single cpu होता है। इसे घरो, स्कूलो और दुकानो मे इस्तेमाल किया जाता है।
उदाहरण के लिए – IBM PC, Personal Computer, Desktop, Laptop, Pentium MIcroprocessor, Apple Macintosh, Mobile, Smartphone, PDA, Embedded Computers,

Personal Computer:

जब हम बात करते है एक वर्ड PC जिसे न जाने कितनी बार आपने सुना और बोला होगा जिसे कहते है PC. हम अक्सर समझते है कि जिस भी कम्प्यूटर मे window install रहता है केवल उसे ही पर्सनल कम्प्यूटर कहते है

लेकिन दोस्तो PC का मतलब है एक ऐसा कम्प्यूटर जो single-user system होता है मतलब  single user की पर्सनल जरूरतो को पूरा करे। इसलिए MAC भी PC के अंदर ही आता है। यह बेसिकली दो तरह का होता है: Desktop & Laptop

Desktop और Laptop इस्तेमाल मे होने वाले सबसे अधिक कामन कम्प्यूटर है। घरो मे, कामर्शियल यूज के लिए, मनोरंजन, डटा स्टोरेज के लिए काम मे लाते हैं

Desktop –

इसे डेस्क पर रखा जाता है तथा उसके बगल मे CPU Cabinate, Keyboard, Mouse, Monitor होता है यह पोर्टेबल नही होता। इसे एक जगह रखकर ही काम मे लाया जाता है। इसका साइज बड़ा होने से इसमे एडवांस्ड कंपोनेन्ट लगा सकते है जो इसकी क्षमता को बढ़ाने का काम करता है।

इसे आप व्यावसायिक और एजुकेशन संस्थानो मे use किया जाता है। इसके अतिरिक्त साधारणतः वर्ड प्रोसेसिंग, अकाउंटिंग मे भी इस्तेमाल किया जाता है।

 

Desktop computer in hindi
Desktop computer

 

Laptop –

इसे नोटबुक भी कहते है। यह पोर्टेबल होता है जिसे आसानी से ले जाया जा सकता है। साधारण लेपटाप की बात करे तो यह डेस्कटाप की तुलना मे कम पावरफुल होता है लेकिन अपनी पोर्टेबिलिटी के कारण यह लोगों के बीच ज्यादा पापुलर रहता है।

यह Portable Computer होता है जिसके सभी component integrated होते हैं।

 

laptop in hindi

 

Netbook –

 इसका साइज लैपटाप से छोटा होता है जो पहले यूज होता था इसके प्रोसेसेर की क्षमता कम थी तथा इसे बेसिक टास्क ही किये जाते थे जैसे- MS Word, Excel, Powerpoint, Internet Browsing.

Mobile/Tablet –

 आज हम Mobile phone, touchschreen, tablet का यूज करते है जिसे हम कही भी ले जा सकते है। शुरू मे इसे सीमित कामो के लिए यूज करते थे लेकिन अब इसका इस्तेमाल Gaming, Video, Camera के लिए होने लगा।

 

Tablet in hindi
 Tablet

Workstation:

यह पर्सनल कम्प्यूटर की तरह ही होता है लेकिन इससे अधिक पावरफुल माइक्रोप्रोसेसर रखता है। इन्हे कुछ सेलेक्टिव कामो के लिए डिजाइन किया जाता है। जैसे – 3 D Graphics, Animation

Others:

 कई डिवाइसेज मे small computer embedded रहता है जैले Smart TV, Card, Microwaves जिसे उस डिवाइस के हिसाब से कुछ टास्क को करने के लिए प्रोग्राम्ड किया जाता है।

Minicomputer:

इसमे माइक्रोकम्प्यूटर की तुलना मे अधिक मेमोरी होता है तथा वेबसर्वर, डाटाबेस, गेमिंग सर्वर मे यूज किया जाता है। यह multi-user system होता है जिसके जरिये 100-200 यूजर्स एक समय मे एक साथ काम कर सकते है।

जैसे – MAGNUM, VAX

Mainframe Computer –

इसमे मल्टीपल प्रोसेसर लगा होता है जिससे फास्ट काम करता है। इसकी प्रोसेसिंग पावर मिनिकम्प्यूटर, पर्सनल कम्प्यूटर, सर्वर तथा वर्कस्टेशन से अधिक होती है। इसे Institutes & Organization द्वारा प्रयोग मे लाया जाता है जहां कई सारे यूजर द्वारा बल्क डाटा प्रोसेसे किया जाता है। इस पर सैकड़ो या हजारो यूजर्स एक साथ काम कर सकते है। 

इनका इस्तेमाल बैंकिंग, कारपोरेट, एयरपोर्ट, कालेज मे होता है।

Exa- IBM Z, UNIVAC

Supercomputer:

सुपर कम्प्यूटर सबसे तेज और एक्सपेंसिव कम्प्यूटर होते है। इनकी संग्रहण क्षमता सबसे अधिक तथा साइज काफी बड़ा होता है इसमे मल्टीपल सीपीयू रखा जाता है जिससे कई लाखों instruction को एक साथ कर सकते है।

Multiprocessing होता है जिससे इस पर कई व्यक्ति एक साथ कार्य कर सकते है। अब तक के सभी कम्प्यूटरो मे यह सबसे पावरफुल होते है।

यह किसी क्रिटिकल टास्क को करने के लिए डिजाइन किये जाते है जैसे nuclear science, weather forecasting, rocket launching, space exploration.

इसके उदाहरण है CRAY-1, Summit, Param, Deep Blue, Seirra.

 

 

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